ए चाँद तेरी चाँदनी से
न जाने क्यों मैं डरता हूँ
भीग कर जिसमे कभी हँसता था
अब सुकून से जलता हूँ
मैं देखता रहा, लोगो बदलते रहे
मैं ने इंतज़ार किया, मुझे खड़ा छोड़ आगे बढेते रहे
मुझ से क्यों न बढ़ा गया
उसी मोड़ पे मैं, आज भी अकेला खड़ा सोचता हूँ
मुझ से जब पूछा था किसी ने
चलो बढ़ चलो मेरे साथ, सहारा मैं देता हूँ,
अब, लौटने की उम्मीद में उसके
क्षितिज पे निगाह टिकाये, आवाज़ में देता हूँ
अजीब मोड़ है अब जिंदगी की
जो गुजारी बस उम्मीदों में
मिलता नहीं कुछ हिसाब अब
जोड़ घटाव रात भर करता हूँ
ए चाँद तेरी चाँदनी से
न जाने क्यों मैं डरता हूँ
भीग कर जिसमे कभी हँसता था
अब सुकून से जलता हूँ
ए चाँद तेरी चाँदनी से, न जाने क्यों मैं डरता हूँ
न जाने क्यों मैं डरता हूँ
भीग कर जिसमे कभी हँसता था
अब सुकून से जलता हूँ
मैं देखता रहा, लोगो बदलते रहे
मैं ने इंतज़ार किया, मुझे खड़ा छोड़ आगे बढेते रहे
मुझ से क्यों न बढ़ा गया
उसी मोड़ पे मैं, आज भी अकेला खड़ा सोचता हूँ
मुझ से जब पूछा था किसी ने
चलो बढ़ चलो मेरे साथ, सहारा मैं देता हूँ,
अब, लौटने की उम्मीद में उसके
क्षितिज पे निगाह टिकाये, आवाज़ में देता हूँ
अजीब मोड़ है अब जिंदगी की
जो गुजारी बस उम्मीदों में
मिलता नहीं कुछ हिसाब अब
जोड़ घटाव रात भर करता हूँ
ए चाँद तेरी चाँदनी से
न जाने क्यों मैं डरता हूँ
भीग कर जिसमे कभी हँसता था
अब सुकून से जलता हूँ
ए चाँद तेरी चाँदनी से, न जाने क्यों मैं डरता हूँ
