Thursday, April 10, 2014

मत रोको मुझे

आने दो अपने पास, मत रोको मुझे
न जाने फिर तुम कब कहाँ मिलो
मतबली दुनिया में हैं रिश्ते बड़े अजीब से
तुम भी न पहचानो  गुजरते वक़्त में शायद
देख गुजरता मुझे अपने करीब से

जो भी है बस यही है
जानना  भी नहीं चाहता
गलत है या फिर सही है
चाहता हूँ बस तुम को देखता हीं रहूँ
ख़ुशी ऐसी महसूस कहीं और होती नहीं है

गुजरते वक़्त में उम्र गुजरती चली  जाएँगी 
चलेंगी साथ कुछ यादें कुछ पीछे छूट जाएँगी
मान कर इतना अब चल चूका हूँ मैं
कहूँगा जब अलविदा इस दुनिया को
कोई साथ हो न हो, यादें जरूर साथ निभाएँगी

Tuesday, April 1, 2014

ढूंढते हैं

कैसी अजीब सी है जिंदगी 
तुम को पता नहीं
तारों के चमक में हम
अब हम तुम्हें ढूंढते हैं

खुद को आईने में देख कर
सोचतें हैं तुम क्या सोचती होगी
हर बार नया कुछ कर के
तुम्हारी नज़र में आने का,  हम बाहाना ढूंढते हैं

कभी यूहीं कभी किसी कारण से
छोटी छोटी बातों से
और रंग बिरंगे फूलों से
तुम को हँसाने का रोज, नया तरीका ढूंढते हैं

रहते हैं दोस्तों के बीच
अजनबी खोए खोए
मगर नज़रें चुरा कर चुपके से
इधर उधर हम बस तुम्हें ढूंढते हैं

अजीब ये हालत है हमारी
छू कर हथेलियों को
लिपट कर अपने बाँहों में
हम तुम्हारी बदन कि गर्मी ढूंढते हैं

सच है मेरे नयन तुम्हें ढूंढते हैं
इधर उधर न जाने क्यों ढूंढते हैं
कुछ न कुछ तो जरुर होगा
हम तो अकेले में,  कारणों  का बस कारण  ढूंढते हैं