इस हॅसी में ना जाने क्या कुछ ख़ास है
बस चमकति रहती है
चाहता हूँ देखता रहूँ चुपचाप
और पूरी होती रहे दिल में जो हर आस है
समझता हूँ, पर शायद समझना नहीं चाहता
अनजान बन, सुनहरी यादों को बटोरने में लगा हूँ
बिना ये पूछे कि तुम क्या चाहती हो
जानता हूँ, आदत है बुरी पर, मैं बदलना नहीं चाहता
तुम को बाँहों में ले, समय को थामे बैठा हूँ
कहीं छूट ना जाए एक पल, रह न जाए कोई बात
यहीं सोच कर मतलबी दुनिया में
एक मतलबी मैं भी बना बैठा हूँ
