मै एक वृक्ष हूँ अब सुखा हुआ
कभी मुझ पर पंछियो का बसेरा था
मै एक वृक्ष हूँ अब सुखा हुआ
बरसों पहले आस भी छूटा
उड़ चुके हैं अब सारे पंछी , घोंसला पूरा खली है
ना जाने क्यों याद नहीं, आंतिम पत्ते से कब रिश्ता टूटा
मै एक वृक्ष हूँ अब सुखा हुआ
बीते काल ने धीरे धीरे सब हरा
घोंसले का एक एक सुखा तिनका
और जो भी बाकि मुझमें था हरा
मै एक वृक्ष हूँ अब सुखा हुआ
थी बसन्त पर मैं था सुखा
प्यार दिखा अपनों ने ही मुझे तोड़ तोड़
मुझसे अपने घर का चूल्हा फूंका
मै एक वृक्ष हूँ अब सुखा हुआ
मै एक वृक्ष हूँ अब सुखा हुआ
मत काटो आज , जड़ों में अभी प्राण बाकी है
देख कुल्हाड़ी जब मैंने कहा
तभी आवाज आई कट दो, अब देने को इस के पास क्या बाकी है
मै एक वृक्ष था सुखा हुआ
किस से कहता , मैं इंसान था, पेड़ मुझे बनाया गया
जब कटा मरा मैं था
पर मुझे चिता बना किसी और को जलाया गया
मै एक वृक्ष था सुखा हुआ
किस से कहता , मैं इंसान था, पेड़ मुझे बनाया गया
जब कटा मरा मैं था
पर मुझे चिता बना किसी और को जलाया गया
