सुनो मेरी मन की वेदना को
अगर समझ सको
बंद कमरे के अन्धेरे कोने में
रखा एक बंद किताब सा
करता रहा हूँ इंतज़ार
कि पड़े नज़र मुझे पर किसी के प्यार की
चाहे मुझे भी कोई, मनहूस नाकारा समझे बिना
शब्द समय कि मरोभूमि में सुख गए
और अब तो सुन भी नहीं सकता
ले कर अपने बाँहों में
चाहता हूँ बस कोई पढ़े
समझे, मुझसे एक शब्द बोले बिना
सुनो मेरी मन की वेदना को
अगर समझ सको
बंद हूँ बरसों से और
समय ने तुम से पहले मुझे छुआ है
धूल से दबे मेरे पीले पानों में कुछ जान अभी बाकी है
हाथों का नरम सहारा दे
पलट सको तो पलटना , मेरे पन्ने तोड़े बिना
कुछ देर साथ रहो , मुझे समझो और
समझने दो मुझे मतलब किसी के साथ का
यहीं दबी रह जाएँगी तुम्हारी यादें मेरे पन्नों के बीच
तुम ने जो उठा कर मुझे रख दिया
बदनसीब हूँ , न पढ़ सको तो कोई बात नहीं
पर चले जाना उम्मीद बनने से पहले, और तोड़े बिना
सुनो मेरी मन की वेदना को
अगर समझ सको, मुझमे अभी कुछ जान बाकि है
अगर समझ सको
बंद कमरे के अन्धेरे कोने में
रखा एक बंद किताब सा
करता रहा हूँ इंतज़ार
कि पड़े नज़र मुझे पर किसी के प्यार की
चाहे मुझे भी कोई, मनहूस नाकारा समझे बिना
शब्द समय कि मरोभूमि में सुख गए
और अब तो सुन भी नहीं सकता
ले कर अपने बाँहों में
चाहता हूँ बस कोई पढ़े
समझे, मुझसे एक शब्द बोले बिना
सुनो मेरी मन की वेदना को
अगर समझ सको
बंद हूँ बरसों से और
समय ने तुम से पहले मुझे छुआ है
धूल से दबे मेरे पीले पानों में कुछ जान अभी बाकी है
हाथों का नरम सहारा दे
पलट सको तो पलटना , मेरे पन्ने तोड़े बिना
कुछ देर साथ रहो , मुझे समझो और
समझने दो मुझे मतलब किसी के साथ का
यहीं दबी रह जाएँगी तुम्हारी यादें मेरे पन्नों के बीच
तुम ने जो उठा कर मुझे रख दिया
बदनसीब हूँ , न पढ़ सको तो कोई बात नहीं
पर चले जाना उम्मीद बनने से पहले, और तोड़े बिना
सुनो मेरी मन की वेदना को
अगर समझ सको, मुझमे अभी कुछ जान बाकि है
