Wednesday, November 13, 2013

गरज - गरज उमड़ बरसे जब बादल


गरज - गरज उमड़ बरसे जब बादल
हवा चतुर - चपल चंकल बन आई
पल-पल  क्षण- क्षण हर बूंदों पर, हर झोखों पर
उमड़- उमड़ मन तरंग तुम्हे और करीब ले आई

सन - सन बहती मदमस्त पवन के
झोंकों पर जब लाता बेल लहराई 
चंचल तितली बन - मन उड़ चला पास तुम्हारे 
सुनहरे सपनों कि ले अंगड़ाई.

उमड़ - उमड़ मेघों ने जब शोर - जोर मचाया
झूम - झूम पेड़ों के पत्तों ने मुझे बहुत उकसाया
टप - टप पड़ती बूदों पर जब लगा मन थिरकने 
आती  हर  झोंकों  कि आहट तुम्हारी पुकार बन आई

श्याम रंग के मेघ संग 
उड़-उड़ तेरी याद जब आई 
बन बिजली मन - क्षण में चमक उठा 
तो क्षणमें उम्मीद गिर धरा से जा टकराई 

सोच - सोच जब तन  मिलन  लगा मन मुस्काने
मृदुल ध्वनि पवन वेग की तुम्हारी साँस बन आई
लिपट-लिपट तुम को चूम लिया 
पर तुम थी जैसे इन्द्रधनुष कि परछाई
 
बरस-बरस घन घोर बरसजोर बरस , तू आज बरस
ऐसे बरस, बिछड़ के जैसे, कोई 
हर मिटती उमीदों के साथ 
तड़प - तड़प कर दो सासें रोई