Friday, September 27, 2013

दिखता है मुझको दूर शितिज पे

दिखता है मुझको दूर शितिज पे
घना अंधियारा आगे बढ़ता हुआ
आगोश में ले मेरी हस्ती मिटाने
खुद ही खुद में मचलता हुआ

मुझ पर विजय की चाहत में
समझ कर बेखबर मुझको
चला आरहा मुस्कराते
गरज गरज हुँकार भरता हुआ

खड़ा हूँ तैयार मै भी, सीना ताने
देख रह हूँ उस को.
आंधी बिजली के साथ
पल पल करीब आगे बढ़ता हुआ
महासंग्राम  से पहले
नमन कर वीरता को उसके और कर के प्रणाम
गर्व कर खुद पे, कर थोडा अभिमान
यूद्ध को तैयार हूँ,  
लडूंगा आज एक वीर से, मुस्कुराता हुआ

आज सनेगी मिटटी उसके हर एक बूंद से
या रंगेगी लाल मेरे बदन से खून से
ये मेरा सौभाग्य है, लड़ रहा हूँ एक माहन बलवान से
हठी हूँ मै , लड़कर मिट  जाऊंगा, अंतिम सासें गिनता हुआ

दिखता है मुझको दूर शितिज पे
घना अंधियारा आगे बढ़ता हुआ
आगोश में ले मेरी हस्ती मिटाने
खुद ही खुद में मचलता हुआ