Wednesday, November 13, 2013

गरज - गरज उमड़ बरसे जब बादल


गरज - गरज उमड़ बरसे जब बादल
हवा चतुर - चपल चंकल बन आई
पल-पल  क्षण- क्षण हर बूंदों पर, हर झोखों पर
उमड़- उमड़ मन तरंग तुम्हे और करीब ले आई

सन - सन बहती मदमस्त पवन के
झोंकों पर जब लाता बेल लहराई 
चंचल तितली बन - मन उड़ चला पास तुम्हारे 
सुनहरे सपनों कि ले अंगड़ाई.

उमड़ - उमड़ मेघों ने जब शोर - जोर मचाया
झूम - झूम पेड़ों के पत्तों ने मुझे बहुत उकसाया
टप - टप पड़ती बूदों पर जब लगा मन थिरकने 
आती  हर  झोंकों  कि आहट तुम्हारी पुकार बन आई

श्याम रंग के मेघ संग 
उड़-उड़ तेरी याद जब आई 
बन बिजली मन - क्षण में चमक उठा 
तो क्षणमें उम्मीद गिर धरा से जा टकराई 

सोच - सोच जब तन  मिलन  लगा मन मुस्काने
मृदुल ध्वनि पवन वेग की तुम्हारी साँस बन आई
लिपट-लिपट तुम को चूम लिया 
पर तुम थी जैसे इन्द्रधनुष कि परछाई
 
बरस-बरस घन घोर बरसजोर बरस , तू आज बरस
ऐसे बरस, बिछड़ के जैसे, कोई 
हर मिटती उमीदों के साथ 
तड़प - तड़प कर दो सासें रोई



Friday, September 27, 2013

दिखता है मुझको दूर शितिज पे

दिखता है मुझको दूर शितिज पे
घना अंधियारा आगे बढ़ता हुआ
आगोश में ले मेरी हस्ती मिटाने
खुद ही खुद में मचलता हुआ

मुझ पर विजय की चाहत में
समझ कर बेखबर मुझको
चला आरहा मुस्कराते
गरज गरज हुँकार भरता हुआ

खड़ा हूँ तैयार मै भी, सीना ताने
देख रह हूँ उस को.
आंधी बिजली के साथ
पल पल करीब आगे बढ़ता हुआ
महासंग्राम  से पहले
नमन कर वीरता को उसके और कर के प्रणाम
गर्व कर खुद पे, कर थोडा अभिमान
यूद्ध को तैयार हूँ,  
लडूंगा आज एक वीर से, मुस्कुराता हुआ

आज सनेगी मिटटी उसके हर एक बूंद से
या रंगेगी लाल मेरे बदन से खून से
ये मेरा सौभाग्य है, लड़ रहा हूँ एक माहन बलवान से
हठी हूँ मै , लड़कर मिट  जाऊंगा, अंतिम सासें गिनता हुआ

दिखता है मुझको दूर शितिज पे
घना अंधियारा आगे बढ़ता हुआ
आगोश में ले मेरी हस्ती मिटाने
खुद ही खुद में मचलता हुआ

Tuesday, August 13, 2013


सखी रे कुछ मत कहना सुन मेरी बात
मै कल सो न सकी जागती रही सारी रात
वचनों और फ़ेरों में बांध  के
जिसको दिया मेरा हाथ
रहना  है संग उसके पर मन देता नहीं साथ


सखी रे कुछ मत कहना सुन मेरी बात
अभी भी महसूस होती  है मुझे
उन हाथों की नरमी , बाँहों का घेरा और सासों की गर्मी
चाहती हूँ जीना संग उसके पर कोई देता नहीं साथ


सखी रे कुछ मत कहना सुन मेरी बात
थिरकता था दिल मेरा सुन जिस का नाम
होती थी बेचैन मिलने जिस से मै सुबह शाम 
चाहती हूँ चल पडूं मै  ऊस की ओर , पर कदम देते नहीं साथ


सखी रे कुछ मत कहना सुन मेरी बात
कहते है सब प्यार वो करेगा , नखरे तेरे सहेगा
मुस्कुराहट जाए की मुरझा और के बाँहों में
खामोश होगी खिलखिलाहट और की आँगन में
चाहती हूँ बता दूँ , पर लब्ज देते नहीं साथ


सखी रे कुछ मत कहना सुन मेरी बात
है जो मेरे दीवाना, मिले तो जरूर बताना
जहाँ भी रहे मन मेरा साथ रहेगा
आशाओं को समेटे , उम्मीदों को सँजोए
अगले जनम में इंतज़ार उस का रहेगा
चाहती हूँ अभी रोक दूँ , पीछे समय को मोड़ दूँ
इन्सान हूँ किस्मत और  वक्त हमेशा देते नहीं साथ