गरज - गरज उमड़ बरसे जब बादल
हवा चतुर - चपल चंकल बन आई
पल-पल क्षण- क्षण हर बूंदों पर, हर झोखों पर
उमड़- उमड़ मन तरंग तुम्हे और करीब ले आई
सन - सन बहती मदमस्त पवन के
झोंकों पर जब लाता बेल लहराई
चंचल तितली बन - मन उड़ चला पास तुम्हारे
सुनहरे सपनों कि ले अंगड़ाई.
उमड़ - उमड़ मेघों ने जब शोर - जोर मचाया
झूम - झूम पेड़ों के पत्तों ने मुझे बहुत उकसाया
टप - टप पड़ती बूदों पर जब लगा मन थिरकने
आती हर झोंकों कि आहट, तुम्हारी पुकार बन आई
श्याम रंग के मेघ संग
उड़-उड़ तेरी याद जब आई
बन बिजली मन - क्षण में चमक उठा
तो क्षणमें उम्मीद गिर धरा से जा
टकराई
सोच
- सोच जब तन
मिलन लगा मन मुस्काने
मृदुल ध्वनि पवन वेग की तुम्हारी साँस बन आई
लिपट-लिपट तुम को चूम लिया
पर तुम थी जैसे इन्द्रधनुष कि परछाई
बरस-बरस घन घोर बरस
, जोर बरस , तू आज बरस
ऐसे बरस, बिछड़ के जैसे, कोई
हर मिटती उमीदों के साथ
तड़प - तड़प कर दो सासें रोई
