बचपन के टूटे सपनो को ... नम आखों में लेके सोता हूँ .....
हर रात , बीते बातें याद कर ......
आज भी रात भर रोता हूँ ...
बचपन की बीतीं यादों का.... .
बड़े छोटे , टूटे उमिदों का
दर्द लीए आज भी जीता हूँ
आज भी रात भर रोता हूँ ...
हर बात , बीतें बातों की...
आसुओं में भीगे उन रातों की .....,
खूब याद दिलाती है , और उन को याद कर
आज भी रात भर रोता हूँ ...
दिल में दबे कुछ यादों का ॥ कुत्च
और सुंदर कुछ खाव्बों का
ख्वाब लीए मै जीता हूँ ....
आज भी रात भर रोता हूँ ...
थोड़ा
हर धोबी , मै ने अपनों का ...
बोझ जो ढोया सपनो का ....
आज भी वो बोझ उठाये ..
आज भी रात भर मै रोते रोते सोता हूँ ....
